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बड़े शहरों में क्यों तेजी से फैल रहा कोरोना? जानिए क्या बोले हेल्थ मिनिस्टर

आज तक के खास कार्यक्रम 'ई-एजेंडा' में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कोराना से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आखिर कैसे महामारी के दौरान देश आगे निकल सकता है. उन्होंने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग ही बचने का एकमात्र रास्ता है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 12 May 2020
बड़े शहरों में क्यों तेजी से फैल रहा कोरोना? जानिए क्या बोले हेल्थ मिनिस्टर लॉकडाउन हटते ही बड़े शहरों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

कोरोना वायरस के चलते देशभर में हुए लॉकडाउन से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है. लेकिन लॉकडाउन में ढील देते ही बड़े शहरों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. आज तक के खास कार्यक्रम 'ई-एजेंडा' में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी और बताया कि आखिर कैसे महामारी के इस दौरान देश आगे निकल सकता है.

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, 'देश में कोरोना के मामले 56,000 हजार से भी ज्यादा हो चुके हैं. लगभग 18,00 लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई है. लगभग 17,000 लोग ठीक होकर घर लौट गए हैं और भारत का रिकवरी रेट भी 30 प्रतिशत है. दुनिया के करीब 20 देशों के बराबर भारत की आबादी है. इसके बावजूद कोरोना से जंग में भारत की स्थिति काफी बेहतर है. सरकार द्वारा बताए गए निर्देशों का लोगों ने गंभीरता से पालन किया है.'

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क्यों बड़े शहरों में बढ़ रहे कोरोना के मामले?

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई जैसे बड़े शहरों में विशिष्ट प्रकार की समस्याएं हैं. यहां ज्यादा भीड़ वाले इलाके हैं. झुग्गी-झोपड़ियां हैं. एक-एक कमरे में 15-15 लोग साथ रहते हैं. संकरी गलियां और एक गली का दूसरी गली से सीधा कनेक्शन है. लॉकडाउन में इन जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग कायम करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है. हम चाहकर भी इन इलाकों में 100 फीसद सोशल डिस्टेंसिंग नहीं लागू कर सकते हैं.

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दूसरा, इन जगहों पर विदेश से आने वाले लोगों की तादाद काफी ज्यादा है. विदेश से आकर मरकज में ठहरने वाली घटनाएं भी इन्हीं शहरों में देखी गई हैं. राज्य और केंद्र सरकार इन जगहों पर कोरोना को कंट्रोल करने का पूरा प्रयास कर रही है. डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि ऐसी जगहों पर कोरोना से निपटने का सिर्फ एक यही तरीका है कि जब तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो जाती तब तक सोशल डिस्टेंसिंग को ही वैक्सीन माना जाए.

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