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'छोटे पर्दे के बड़े स्‍टारों' ने जताए मजबूत इरादे

'एजेंडा आजतक' के बेहद रोचक सत्र 'छोटा पर्दा, बड़े स्‍टार' में अभिनेत्री कृतिका कामरा ने कहा कि टेलीविजन से जुड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह नहीं है कि आप पॉपुलर हो जाते हैं.

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आजतक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 07 December 2012
'छोटे पर्दे के बड़े स्‍टारों' ने जताए मजबूत इरादे

'एजेंडा आजतक' के बेहद रोचक सत्र 'छोटा पर्दा, बड़े स्‍टार' में अभिनेत्री कृतिका कामरा ने कहा कि टेलीविजन से जुड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह नहीं है कि आप पॉपुलर हो जाते हैं. उन्‍होंने कहा कि सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि आप हर दिन दर्शकों की जिंदगी का हिस्‍सा बन जाते हैं.

मॉडर्न लड़की का किरदार निभाना पसंद: कृतिका
धारावाहिकों में अपनी भूमिका के बारे में कृतिका कामरा ने कहा कि वे आज की लड़की का किरदार निभाती हैं. उन्‍होंने कहा, 'दर्शक मुझमें बहन देखते हैं, बेटी देखते हैं.'

'बालिका वधू' का सकारात्‍मक असर: अविका
अविका गौर ने कहा, 'बालिका वधू के कारण मुझे बहुत प्यार मिला है. मैं टीवी के लिए ही बनी हूं.' अविका ने कहा कि अभिनेत्री के तौर हर उम्र के किरदार निभाने चाहिए. उन्‍होंने कहा कि बालिका वधू का समाज पर सकारात्मक असर हुआ है. उन्‍होंने कहा कि सीरियल से मिलने वाली छोटी जानकारियां भी लोगों के लिए मददगार साबित होती हैं. उन्‍होंने कहा कि सामाजिक मुद्दों पर अब ज्यादा सीरियल बनते हैं.

टीवी कलाकारों की स्थिति बेहतर: समीर
इसी सत्र में समीर सोनी ने स्‍वीकार किया कि टीवी कलाकारों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है. उन्‍होंने कहा कि अब प्रसिद्धि के मामले में टीवी कलाकार भी पीछे नहीं हैं. उन्‍होंने कहा कि सही मायने में धारावाहिक एक लत होती है.

समीर सोनी ने खुले तौर पर स्‍वीकार किया कि वे खुद पहले सीरियल को पसंद नहीं करते थे. उन्‍होंने कहा, 'सामाजिक जिम्मेदारी से मेरा सरोकार नहीं है. हमारा मुख्य उद्देश्य एंटरटेनमेंट है. हमारी जिम्मेदारी है, पर उसकी एक सीमा है.'

समीर सोनी ने कहा कि कंटेंट को लेकर जिम्मेदारी लेखक की होती है. उन्‍होंने कहा कि हर कलाकार की एक सीमा होती है. उन्‍होंने सवाल उठाया कि आखिर यह कैसा तय होगा कि कौन-सा सीरियल सबको पसंद आएगा? उन्‍होंने कहा कि कंटेंट को लेकर मन में सवाल उठते हैं, पर टीआरपी के चलते समझौता कर लिया जाता है. समीर ने कहा कि टीवी से हरेक इंसान प्रभावित होता है, पर समाज सुधारना हमारी जिम्मेदारी नहीं है.

पसंद आने पर ही बनते हैं 1000 एपिसोड
चर्चा में गर्मजोशी से शिरकत करते हुए कहा कि साक्षी तंवर ने कहा कि आज महिला कैरेक्‍टर सिर्फ अच्छे और बुरे की लड़ाई में नहीं फंसी है. उन्‍होंने कहा कि 'पार्वती' का कैरेक्टर जिंदगी से कहीं परे था. उन्‍होंने कहा कि लोग देखना भी चाहते हैं और कई तरह के सवाल भी उठाते हैं. उन्‍होंने कहा कि जब कैरेक्टर दर्शकों को पसंद आ जाता है, तभी सीरियल 1000 एपिसोड का बनता है. उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि कंटेंट को लेकर कलाकार की जिम्मेदारी होती है.

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