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एजेंडा आजतक: 'देश का नेता कैसा हो' पर महाबहस

हिंदी जगत के महामंच एजेंडा आजतक के पहले सत्र का विषय 'देश का नेता कैसा हो' जितना रोचक और महत्‍वपूर्ण था उसकी शुरुआत भी वैसी ही हुई. इस मुद्दे पर महाचर्चा की शुरुआत की कांग्रेस के नेता और केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्‍बल ने.

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आज तक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 07 December 2012
एजेंडा आजतक: 'देश का नेता कैसा हो' पर महाबहस

हिंदी जगत के महामंच एजेंडा आजतक के पहले सत्र का विषय 'देश का नेता कैसा हो' जितना रोचक और महत्‍वपूर्ण था उसकी शुरुआत भी वैसी ही हुई. इस मुद्दे पर महाचर्चा की शुरुआत की कांग्रेस के नेता और केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्‍बल ने.

सिब्‍बल ने कहा कि आज के नेताओं के सामने कई तरह की मजबूरियां हैं. उन्‍होंने कहा कि बांटने की राजनीति देश के लिए ठीक नहीं है और राजनीति में कड़वापन और कठोरता आ गई है. उन्‍होंने कहा कि आज की परिस्थितियां आजादी से पहले की परिस्थितियों से काफी अलग हैं और आज के नेताओं की तुलना गांधी और नेहरू से नहीं की जा सकती है.

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा, 'ईमानदारी से राजनीति नहीं करने वाले नेता को वोट मिलते हैं. आप किस परिवार से आए हो, आपके पास कितना पैसा है. ये मापदंड बन गया है.' जेटली ने कहा कि नेता बनने के लिए मापदंड बदल गए हैं और राजनीतिक दलों की ढांचे में परिवर्तन आया है.

सीपीएम के वरिष्‍ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा, 'देश के नेता का दृष्टिकोण साफ होना चाहिए.' उन्‍होंने कहा कि देश की राजनीति में बदलाव आज का युवा लाएगा. येचुरी ने कहा कि देश का नेता ऐसा हो जिसके उद्देश्य में खामियां न हों. येचुरी को उम्मीद है कि देश में राजनीति की स्थिति बदलेगी.

अरुण जेटली ने आगे कहा कि देश में लेफ्ट और बीजेपी ही सिर्फ दो ढांचागत पार्टियां हैं. जेटली ने कहा कि ढांचागत राजनीतिक पार्टियों में कमजोरी आई है. इस मौके पर जेटली ने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि बीजेपी की राजनीति आरएसएस तय नहीं करता है. उन्‍होंने कहा कि भारतीय राजनीति सफल तभी होगी जब क्षमता के आधार पर नेता चुने जाएंगे.

आदर्श नेता के नाम पर चुप्पी
देश का नेता कैसा हो पर बहस के दौरान अलग-अलग पार्टियों के इन तीनों नेताओं से जब पूछा गया कि किसी भी आदर्श नेता का नाम बताएं तो सभी चुप्पी साध गए. इससे पहले कपिल सिब्बल ने कहा था कि देश में अब भी कई आदर्श नेता हैं.

सिब्बल ने राजनीतिक जवाब देते हुए कहा कि आपको जनता से पूछना चाहिए कि देश में आदर्श नेता कौन है. उन्होंने गांधी जी के संदर्भ में कहा कि वे अगर आज पैदा होते तो कैसे नेता होते, कहा नहीं जा सकता. आज की परिस्थितियां पहले की बजाय बहुत भिन्न हैं. सीताराम येचुरी ने कहा कि नेता परिस्थितियों के आधार पर बनते हैं. इसी पर जेटली ने कहा कि राजनीतिक हालात लगातार बदलते रहते हैं, यही हालात नेता पैदा करते हैं.

फैसले लेते वक्त नेताओं पर कितना दबाव?
कपिल सिब्बल ने कहा कि देश के बड़े फैसले लेते वक्त सरकार पर कोई दबाव नहीं होता. आरोप लगते हैं कि कॉरपोरेट हाउसेज के दबाव में आकर सरकार फैसले लेती है, लेकिन ऐसा नहीं होता. सरकार अपने फैसले निष्पक्ष होकर देशहित में लेती है. इसी मुद्दे पर अरुण जेटली ने कहा कि कई तरह के प्रेशर ग्रुप सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की बहुत सी जिम्मेदारियां होती हैं. राजनीतिक दलों को इन पर खरा उतरना होता है.

केजरीवाल के आरोप पर चर्चा
अरविंद केजरीवाल अक्सर यह आरोप लगाते रहते हैं कि बीजेपी और कांग्रेस में सांठगांठ है. इसी पर अरुण जेटली ने कहा कि ऐसा नहीं है. दोनों पार्टियों में कोई फिक्सिंग नहीं होती. केजरीवाल के आरोपों पर कपिल सिब्बल ने कहा कि राजनीति में इन दिनों बड़े हल्केपन से आरोप लगाए जा रहे हैं. यदि आरोप में तथ्य हों तो उन्हें जनता के बीच में उठाया जा सकता है, लेकिन निराधार आरोपों पर कुछ भी नहीं किया जा सकता.

अरुण जेटली ने कहा कि राजनीति अब सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं है. इस पर सिविल सोसाइटी और मीडिया का पूरा प्रभाव है. इन दोनों की राजनीति में बड़ी भूमिका है. जेटली कहते हैं कि कई बार बिना पुख्ता तथ्यों और सबूतों के आरोप लगा दिए जाते हैं.

क्षेत्रीय दलों का प्रभाव
सीपीआई नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि देश की सामाजिक वि‍विधता राजनीति में भी दिखेगी. आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीतिक दल देश की राजनीति में बड़ी भूमिकाएं निभाएंगे. नेशनल लेवल की पार्टियों को इन क्षेत्रीय दलों को जोड़ना पड़ेगा. सिब्बल ने कहा कि कोई भी ऐसा राजनीतिक दल नहीं है जो सौ करोड़ लोगों के सभी सपने साकार कर सके. अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर कहा कि पिछले 20-30 सालों में क्षेत्रीय दल काफी प्रभावी हुए हैं. ऐसे में क्षेत्रों की उम्मीदों ने दम पकड़ा है.

एफडीआई के मसले पर फिक्‍सिंग
बीजेपी नेता अरुण जेटली का मानना है कि सदन में एफडीआई के मुद्दे पर सीबीआई ने सदन में फिक्सिंग कराई है. यदि सभी दल वोट करते तो परिणाम कुछ और होता. सीबीआई पूरी तरह सरकार की पकड़ में है और सरकार उससे वैसा ही काम लेती है, जैसा वह चाहती है. सीताराम येचुरी ने रिटेल में एफडीआई के मसले पर कहा कि यह मामला सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष मुद्दे का नहीं था. यह देश के लिए था. इसी पर कपिल सिब्बल ने एनडीए पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि एनडीए के समय में भी सीबीआई का गलत इस्तेमाल हुआ था.

लोकपाल पर बहस
कपिल सिब्बल इस अहम मुद्दे पर बीजेपी से सवाल करते हुए कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी इसे अपने राज्यों में लागू क्यों नहीं करती? यदि वह ऐसा करती, तभी उसे यूपीए से सवाल करने का हक मिलता. सिब्बल ने मुख्य रूप से गुजरात का मुद्दा उठाया.

अगला नेता कौन होगा
कपिल सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस का अगला नेता कौन होगा, इसे 2014 में तय किया जाएगा. उधर, नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पर अरुण जेटली ने कुछ भी नहीं किया और सवाल को टाल गए. जेटली ने कहा बीजेपी और एनडीए समय आने पर अपना नेता तय करेगी. उससे पहले कुछ भी कहना ठीक नहीं है. सीताराम येचुरी ने भी कहा कि राष्ट्रीय दलों के लिए जरूरी नहीं कि चुनावों से पहले वे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की की घोषणा करें.
 यह फैसला पार्टी को ही लेना होता है.

राजनीतिक दलों की छवि
अरुण जेटली ने कहा कि हर राजनीतिक दल को अपनी छवि की चिंता रहती है. इस पर पार्टी के भीतर ही चर्चा भी होती रहती है. किसी भी दल पर अगर आरोप लगते हैं तो वह इस पर चिंतन जरूर करती है. कपिल सिब्बल ने भी कहा कि पार्टी पर लगने वाले आरोपों पर पार्टी के भीतर ही चर्चा होती है और इस पर विचार किया जाता है.

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