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एजेंडा आज तक में सवालों के बाउंसर पर वीरेंद्र सहवाग का दनदनाता छक्का

एजेंडा आज तक में वीरेंद्र सहवाग ठीक उसी अंजाद में बैटिंग करते नजर आए जैसा वो क्रिकेट के मैदान में बड़े से बड़े गेंदबाजों को पीटने के लिए किया करते थे. इस सेशन में उन्हें उनकी बैटिंग के लिए नहीं बल्कि ट्विटर पर उनके नए अवतार के लिए बुलाया गया.

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अभिजीत श्रीवास्तव/ विक्रांत गुप्ता नई दिल्ली, 07 December 2016
एजेंडा आज तक में सवालों के बाउंसर पर वीरेंद्र सहवाग का दनदनाता छक्का वीरेंद्र सहवाग

आपका ट्वीट आज ज्यादा पॉपुलर है.
एक्टर रणवीर ने मुझे कहा मैं तो रात के तीन बजे तक तु्म्हारे ट्वीट का इंतजार करता रहता हूं. दबाव ज्यादा बढ़ता जा रहा है. मैं 100 टेस्ट मैच क्रिकेट खेला हूं. जहां जाओ वहां लोग मांग करते हैं कि कुछ कह दो. जब सोता हूं तो याद आती है तो मैं उठ कर सब कुछ लिख लेता हूं. मैं गजनी की तरह हूं. मुझे बड़ी पारियां याद हैं लेकिन छोटी नहीं.

ड्रेसिंग रूप में भी वीरू के फंडे थे?
हां, पुराने जमाने के कमेंटेटर थे उनकी नकल किया करते थे. अगर आप टेस्ट मैच में पहली बॉल पर आउट हो जाओ तो दिन के छह घंटे काटे नहीं कटते थे तो क्या करते. अगर आप सो गए तो कोई जूता मारेगा कोई पानी डाल देगा...

सचिन ने जो कहा कि वीरू मेरे फेवरेट क्रिकेटर हैं तो आपके कौन हैं?
मेरा फेवरेट खिलाड़ी मैं खुद हूं.

इस ड्रेसिंग रूम में सभी दाढ़ी वाले हैं, ऐसा क्यों?
मेहराजगढ़ के फोर्ट की जिम्मेवारी आ गई है शायद इस वजह से. हमारे जमाने में ट्रेंड था सचिन क्लीन शेव आते थे हम उन्हें फॉलो करते थे आज विराट को सभी फॉलो करते हैं.

फिल्मों से पहले राष्ट्रगान बजाने पर क्या है आपकी राय?
इसमें क्या हर्ज है. इसे और आगे ले कर जाना चाहिए. सिर्फ फिल्मों ही क्यों. ऑफिस में बल्कि हर उस जगह पर जहां कुछ अच्छा हो रहा है वहां इससे शुरू करना चाहिए.

माइक पर क्या बोलना चाहिए?
जितनी ज्यादा पॉजिटिव बात करो. अपनी टीम की बुराई करने से अच्छा इंग्लैंड की बड़ाई कर दो. मेरे पास माइक है तो मैं उस पर बुराई की जगह बड़ाई करता हूं.

विराट कोहली की बैटिंग देखकर किसकी याद आती है?
किसी की नहीं, विराट की बैटिंग खुद उसके जैसी ही है. 2016 के आंकड़े ब्रैडमैन से भी अच्छे हैं. टी20, वनडे और टेस्ट सभी में अच्छे हैं. किसी और खिलाड़ी से तुलना नहीं की जानी चाहिए. मेरी तुलना सचिन से की जाती थी. 10-12 वनडे में फेल हो गया तो खुद से कहा कि भाड़ में जाए तेंदुलकर अब अपनी बल्लेबाजी करता हूं. तेंदुलकर और सहवाग में एक ही अंतर है कि दोनों के बैंक बैलेंस में बहुत अंतर है.

तेंदुलकर आपके स्कूल में आए थे?
मैं तीसरे ट्रिपल सेंचुरी बनाने वाला था. एक दिन पहले मैं गॉड जी के पास गया और उनसे कहा कि अगर मैं तीसरी बार ट्रिपल सेंचुरी बनाउंगा तो आपको एक काम करना होगा और आप ना नहीं करोगे. उन्होंने हांमी भर दी, लेकिन मैं 293 पर आउट हो गया और फिर वो बात मैंने उनसे की ही नहीं. वो बात थी कि 2011 में स्कूल की ओपनिंग होनी थी, मैंने सोचा था कि उन्हें इसके लिए बुलाउंगा. लेकिन मैंने ट्रिपल सेंचुरी बनाई नहीं तो बुलाया नहीं. अब वो समय निकाल कर आए तो मैं उनका आभारी हूं.

सबसे अच्छे दोस्त कौन थे?
द्रविड़, लक्ष्मण, जहीर, सचिन, सभी. लेकिन सबसे ईमानदार थे लक्ष्मण. सबसे जरूरी नाम सौरव गांगुली लेना भूल गया.

सौरव ने पहली बार ओपनिंग करवाई तो आपसे क्या कहा?
यह सौरव का आइडिया था ही नहीं. जहीर खान ने उन्हें सलाह दी थी. सौरव ने कहा कि पागल हो गए हो तो जहीर नो जोर दिया. फिर मुझे ट्राई किया. मैंने कहा कि फेल हो जाऊं तो निकालोगे तो नहीं, लिख कर दो. फिर जॉन राइट ने लिख कर दिया.

पाकिस्तान खेलने के लिए गए तो वहां का माहौल कैसा था?
पाकिस्तानी खिलाड़ी हमारे लिए मटन बना कर लाते थे. हमारी मेहमानवाजी बहुत अच्छे से की गई. सरहद पर जो होता है वो अच्छी बात नहीं है. एक जान जाती है तो उसके पीछे कई जानें जाती हैं. हममें से कोई नहीं लगा सकता वो ही लगा सकता है जिसके घर में ऐसा हुआ हो.

आपका फेवरेट मैच कौन सा है?
मेरे विचार से मेरा पहला टेस्ट लेकिन टीम के लिहाज से नेटवेस्ट ट्रॉफी का फाइनल. मोहम्मद कैफ की लाइफ बदल गई उस मैच के बाद. 325 के स्कोर का पीछा कर रहे थे. पहले 15 ओवर्स में 105 रन.

आप कहां थे जब सौरव टीशर्ट उतार कर लहरा रहे थे?
दादा अपनी शर्ट लहरा रहे थे लेकिन मैं बगल में था. मैंने नहीं उतारी.

सौरव अब शांत हो गए हैं, ऐसा क्यों?
बुढ़ापे में आदमी समझदार हो जाता है.

राजीव शुक्ला से प्रश्न
जॉन राइट ने धक्का दिया था वो क्या मामला था?
ओवल में सेंचुरी चाहते थे जॉन राइट लेकिन वीरू आउट हो गए. जब ड्रेसिंग रूम में आए तो जॉन राइट ने धक्का दे दिया. फिर मैंने मामले को सुलझाया.

सहवाग से सवाल
आपने क्या जॉन राइट को माफ कर दिया?
हां जब वो मुझसे माफी मांगे तो मैंने माफ कर दिया.

इस इंडियन टीम से क्या उम्मीद करें?
इसमें विदेशों में टेस्ट जीतने का दम खम है. सौरव गांगुली की ही तरह इस टीम में भी बहुत आगे जाने का दम है.

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