एडवांस्ड सर्च

''अगर मैं प्रधानमंत्री बनूं''

हमें ऐसे सक्षम लोगों को तलाशने की जरूरत है जो सार्थक सुधारों की योजना बनाकर उन्हें लागू कर सकें ताकि सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को जीवंत और समाज के प्रति जवाबदेह बनाया जा सके. चुनाव परिणाम । शख्सियत । विश्‍लेषण । चुनाव पर विस्‍तृत कवरेज

Advertisement
Sahitya Aajtak 2018
एन. चंद्रबाबू नायडु, अध्यक्ष, तेलुगु देशम पार्टी 19 May 2009
''अगर मैं प्रधानमंत्री बनूं'' एन. चंद्रबाबू नायडु

भारत महान राष्ट्र है. पंद्रह साल से भी पहले मैंने इसकी आंतरिक शक्ति को पहचाना और उस समय जब बहुत कम लोग इस बारे में विचार करते थे मैंने एक ऐसे दस्तावेज को रूपाकार दिया जो बाद में एक अग्रगामी और प्रेरणादायक दस्तावेज बना-आंध्र प्रदेश के लिए विजन-2020. सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इसी तरह का काम किए जाने की जरूरत है. मेरा पक्का विश्वास है कि देश का मानव संसाधन समृद्ध और अच्छा है, और अगर प्रशिक्षित करके उनका उचित इस्तेमाल किया जाए तो वे कल्पना से परे नतीजे दिखा सकते हैं.

मैंने तभी यह देख लिया था और मैं दलील देता आ रहा हूं कि भारत 21वीं सदी की पहली तिमाही तक दुनिया के तीन या चार सर्वोच्च राष्ट्रों में शामिल हो सकता है. आज भारत में ऐसा ही हो रहा है. अगर आप देखें कि भारतीय दुनिया भर में क्या कर रहे हैं तो यह जानकर संतुष्टि होगी कि वे असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. इसकी तीन प्रमुख वजहें हैं: भारतीय अपने स्वभाव से बहुत मेहनती हैं; वे मुख्यतः मध्य और निम्न मध्यवर्ग से हैं, जिनका विश्वास है कि धैर्य का फल मीठा होता है; और तीसरी बात यह कि वे कई नपे-तुले जोखिम उठाकर उद्यमशीलता का भी प्रदर्शन कर रहे हैं.

यूरोप, अमेरिका, चीन और जापान के समाजों को देखने पर हमें जबरदस्त शक्ति का एहसास होता है-हमारे पास युवाओं की बड़ी संख्या है, जो उनके पास नहीं है या उस पर सचमुच फख्र महसूस कर सकते हैं. यह हकीकत है कि हमारी आबादी की 50 फीसदी की आयु 25 साल से कम है. यह हमारी सबसे बड़ी थाती है जबकि कई विकसित और विकासशील देशों के लिए उनकी बुढ़ाती आबादी सबसे बड़ी बाधक है. भारत धीरे-धीरे निश्चित रूप से अपनी इस ताकत का इस्तेमाल कर रहा है.

इसी वजह से भारत 1991 में अपनी अर्थव्यवस्था को मुक्त करने और उदारीकरण की विशेषताओं को अपनाने के बाद सुधार कर रहा है. एक समाज के रूप में हमारी प्रगति दिलासा देने वाली है और बहुत कम लोगों को लगता था कि हालात इस तरह सुधरेंगे. लेकिन दूसरे लोकतांत्रिक और खुले समाजों के साथ इसकी तुलना करने पर दिल बैठ जाता है. यह इसलिए कि अमीर अधिक अमीर होते जा रहे हैं. दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों में से चार भारत के ही हैं. इससे भी बदतर यह कि सबसे ज्‍यादा अमीर लोगों में 40 फीसदी भारतीय ही हैं. यह हमारे जैसे बहुस्तरीय समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है. धन का निर्माण जरूरी है लेकिन धन का सार्थक वितरण भी उतना ही जरूरी है.

अपनी सामाजिक चिंताएं दूर करने और संपन्न तथा वंचित लोगों के बीच की खाई पाटने के मामले में यही असली चुनौती है. लेकिन हमें उसे पूरा करने के लिए पेयजल मुहैया कराने, कुपोषण दूर करने तथा अपने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने जैसी सामाजिक चुनौतियों से निबटने के लिए अपनी राजनैतिक, प्रशासनिक और यहां तक कि न्याय व्यवस्था में भी सुधार करने की जरूरत है. हमारे संविधान में किसी तरह की ज्‍यादती को रोकने की व्यवस्था है लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारियां तथा कर्तव्य निभाने में कोताही और लापरवाही से रोकने के लिए बहुत कम या वस्तुतः नहीं के बराबर व्यवस्था है. हमारे लोकतंत्र को इससे बढ़त और घाटा, दोनों है.

हमें ऐसे सक्षम लोगों को तलाशने की जरूरत है जो सार्थक सुधारों की योजना बनाकर उन्हें लागू कर सकें ताकि सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को सक्रिय किया जा सके और समाज के प्रमुख को जवाबदेह बनाया जा सके. निजी स्वार्थ के लिए व्यवस्थाओं को तोड़ने के प्रयास रोकने चाहिए. इसकी बजाए इन संस्थाओं को मजबूत करने के तरीके निकालने चाहिए और अगर जरूरत हो तो इसके लिए दूरगामी सुधारों के सुझाव देकर उन्हें मजबूती से लागू करना चाहिए.

मैंने आंध्र प्रदेश में इसके लिए प्रयास किए हैं, कुछ विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और सुविधाएं तैयार की हैं. इनमें एक नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो दुनिया के 10 बेहतरीन हवाई अड्डों में शामिल है, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, जिसे बेहतरीन संस्थाओं में गिना जाता है, और एक इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, जिसका पूरे एशिया में कोई सानी नहीं है, शामिल हैं. मुझे अपने इसी अनुभव की वजह से लगता है कि भारत निश्चित रूप से अगले 20 साल से भी कम वर्षों में दुनिया के प्रमुख राष्ट्रों में से एक होगा.

सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि राजनीति में रहते हुए किसी को भी नीतिनियंता बनना है तो उसके सामने धन का निर्माण करते हुए गरीब लोगों के हितों को ध्यान में रखकर संवेदनशील वर्गों की रक्षा करना सबसे बड़ी चुनौती है. मैं हमेशा से यही करता रहा हूं और करता रंगा. कैश ट्रांसफर स्कीम, जिसका मैंने चुनाव में वादा किया है, इसी तरह की एक पहल है. मेरी कोशिश यही रहती है कि दूसरे समाज में आजमाए गए गरीब समर्थक कार्यक्रमों को अपने यहां लागू किया जाए.

मैं अपनी सामाजिक चिंता की वजह से संतुलित विकास और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास करता हूं. मेरा मानना है कि हम इसी तरह मजबूत और स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकते हैं. हम सही दिशा में जा रहे हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि अधिकाधिक राजनीतिक, खासकर नए और युवा राजनीतिक, जरूरी प्रतिबद्धता और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करेंगे. अगर उन सबने प्रतिबद्धतापूर्वक ऐसा कर दिखाया तो विकसित होते राष्ट्र के रूप में हम लोगों से किए गए अपने वादे अच्छी तरह से निभा सकते हैं.

एन. चंद्रबाबू नायडु से 5 सवाल

आप भारत को आर्थिक संकट से उबारने के लिए क्या करेंगे?
यह कुछ समय तक रहने वाला संकट है. हमें संपत्ति निर्माण, अधिक राजस्व पैदा करने, रोजगार के अवसरों का सृजन करने और संकट की इस घड़ी में गरीबों को संरक्षण देने की जरूरत है.

आप राष्ट्रीय सुरक्षा में लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए क्या उपाय करेंगे?
आतंक के खिलाफ जंग में तदर्थ प्रतिक्रिया और रवैए की जगह सख्त नीति अपनानी चाहिए. पुलिस सुधार लागू करने समेत प्रशासनिक सुधार समय की मांग है. विशेष काम करने के लिए हाल में बनाई गई राष्ट्रीय जांच एजेंसी जैसी और संस्थाएं बनाने से विश्वास बहाल हो सकता है.

अपराध न्याय व्यवस्था की हालत खराब है. आप क्या करेंगे?
कई आयोगों ने अपराध न्याय व्यवस्था और जेलों में सुधार की सिफारिश की है. हमें उन्हें फौरन लागू करने की जरूरत है.

प्रशासन भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी का शिकार है. आप क्या करेंगे?
ऐसी व्यवस्था विकसित करूंगा जिससे फैसला करने के मामले में पारदर्शिता को बढ़ावा मिले. इसमें प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल शामिल है. लक्षित लाभार्थियों को कल्याण योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है.

राजनीति का अपराधीकरण अब महामारी बन गई है. आप इसे कैसे खत्म करेंगे?
राजनैतिक पार्टियों को मिलने वाले पैसे का हिसाब-किताब होना चाहिए और काले धन को रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए. इससे अपराधीकरण रुक जाएगा. इसके लिए हमें चुनाव प्रक्रिया में भी सुधार करने की जरूरत है.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay