एडवांस्ड सर्च

ब्याज दरों में कटौती न होने से रीयल्टी कंपनियां नाखुश

रीयल इस्टेट उद्योग ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती न किए जाने पर निराशा जताई है. उद्योग का कहना है कि घर की मांग बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कटौती जरूरी है.

Advertisement
आजतक ब्यूरो/भाषानई दिल्ली, 15 March 2012
ब्याज दरों में कटौती न होने से रीयल्टी कंपनियां नाखुश

रीयल इस्टेट उद्योग ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती न किए जाने पर निराशा जताई है. उद्योग का कहना है कि घर की मांग बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कटौती जरूरी है.

कनफेडरेशन आफ रीयल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (केड्राई) के चेयरमैन प्रदीप जैन ने कहा, ‘हम रिजर्व बैंक के रुख से काफी निराश हैं. आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है. सरकार और रिजर्व बैंक को स्थिति को समझना चाहिए और कोष की लागत को कम करना चाहिए.’

जैन ने कहा कि रिजर्व बैंक अंतरिम राहत के रूप में ब्याज दरें घटानी चाहिए. इससे डेवलपर्स और घर के खरीदारों के लिए कोष की लागत कम होगी. भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में रेपो दर को 8.5 प्रतिशत पर कायम रखा है.

रिवर्स रेपो दर 7.5 फीसद पर बनी हुई है. पिछले दो साल में रेपो और रिवर्स रेपो दरों में अच्छी खासी वृद्धि हुई है, जिससे घरों की मांग पर असर पड़ा है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay