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सब्सिडी नहीं, कृषि क्षेत्र की उत्पादकता पर हो ध्यानः महिन्द्रा

कृषि से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र में मंदी पर चिंता जाहिर करते हुए प्रमुख वाहन कंपनी महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने कहा कि आगामी बजट में सरकार को कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये, न कि भरण पोषण सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी बढ़ाने पर जोर देना चाहिये.

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आजतक ब्यूरो/भाषानई दिल्ली, 15 March 2012
सब्सिडी नहीं, कृषि क्षेत्र की उत्पादकता पर हो ध्यानः महिन्द्रा पवन गोयनका

कृषि से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र में मंदी पर चिंता जाहिर करते हुए प्रमुख वाहन कंपनी महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने कहा कि आगामी बजट में सरकार को कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये, न कि भरण पोषण सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी बढ़ाने पर जोर देना चाहिये.

महिन्द्रा एंड महिन्द्रा (ऑटोमोटिव एंड फॉर्म इक्विपमेंट क्षेत्र) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने कहा, ‘पिछले तीन चार महीनों में ट्रैक्टर उद्योग में विकास काफी धीमा रहा है. वास्तव में पिछले दो महीनों के दौरान वृद्धि कम रही है.

उन्होंने कहा, यह केवल ट्रैक्टर उद्योग के लिए ही नहीं है बल्कि हर उस क्षेत्र में हुआ है जो कृषि से संबद्ध है. फिलहाल चिंता यह है कि कृषि उत्पादों पर काफी दबाव है.

दीर्घकालिक समाधान का आह्वान करते हुए गोयनका ने कहा कि आगामी बजट में ध्यान बजाय सब्सिडी के बजाय उत्पादकता को बढ़ाने पर केन्द्रित करना होगा.

उन्होंने कहा कि इसलिए मशीनीकरण, जल संरक्षण अथवा लघु सिंचाई अथवा फसल देखरेख से जुड़ी किसी भी चीज पर ध्यान देने का इस उद्योग पर सकारात्मक प्रभाव होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि पर भी दीर्घावधिक असर होगा.

गोयनका ने कहा कि वित्तमंत्री को ग्रामीण क्षेत्र की दिशा में कुछ करना होगा, या तो वह सब्सिडी बढ़ायें अथवा कुछ और उपाय करें. ऑटोमोटिव क्षेत्र में प्रस्तावित ‘डीजल कर’ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, अगर डीजल वाहनों पर कोई कर लगाया जाता है तो यह इस उद्योग को और सुस्त कर देगा जिसके लिए पहले से ही 2011 का वर्ष मुश्किलों वाला वर्ष रहा है. उन्होंने आगे कहा कि ऐसा कोई भी कर महिन्द्रा एंड महिन्द्रा की विस्तार योजनाओं को कुछ प्रभावित कर सकता है.

डीजल कर का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि सरकार को डीजल कीमतों को बढ़ाकर बाजार आधारित करना चाहिये, पेट्रोल की जगह डीजल वाहनों के प्रयोग बढ़ाने को प्रोत्साहित करना चाहिये और इस प्रकार तेल आयात खर्च में कमी लानी चाहिये.

केन्द्रीय मूल्यवर्धित कर (सेनवैट) में दो प्रतिशत की वृद्धि की संभावना के बारे में उन्होंने कहा कि ऑटो उद्योग को उम्मीद थी कि यह वर्ष 2011 के बराबर ही रहेगा क्योंकि 2011 कोई बढ़िया वर्ष नहीं था और 2012 भी एक मुश्किल वर्ष प्रतीत होता है.

उन्होंने कहा, हालांकि सख्त राजकोषीय स्थिति के कारण हम (ऑटो क्षेत्र) इस बजट में किसी उत्प्रेरक की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, मुझे उम्मीद होगी कि बजट में सेनवैट शुल्क में बढ़ोतरी जैसे कोई हतोत्साहित करने वाली चीज नहीं हो. गोयनका ने कहा कि अगर कोई ऐसी वृद्धि होगी तो उसका बोझ तत्काल ग्राहकों पर डाल दिया जायेगा.

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