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चंद घंटे के विवाद में नप गई रेल मंत्री की कुर्सी

आज की जो सबसे बड़ी खबर है, वो है संसद के इतिहास का सबसे कमजोर दिन. चंद घंटे के विवाद में नप गई रेल मंत्री की कुर्सी. ममता बनर्जी के आगे सरकार ने कर दिया सरेंडर. देर रात दिनेश त्रिवेदी ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया.
चंद घंटे के विवाद में नप गई रेल मंत्री की कुर्सी दिनेश त्रिवेदी
रीमा पराशर/सुमित अवस्थीनई दिल्ली, 15 March 2012

आज की जो सबसे बड़ी खबर है, वो है संसद के इतिहास का सबसे कमजोर दिन. चंद घंटे के विवाद में नप गई रेल मंत्री की कुर्सी. ममता बनर्जी के आगे सरकार ने कर दिया सरेंडर. देर रात दिनेश त्रिवेदी ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. प्रधानमंत्री ने त्रिवेदी का इस्तीफा मंजूर कर लिया है.

रेल बजट में यात्री किराया बढ़ाने से नाराज थीं ममता बनर्जी. ममता बनर्जी ने अगले रेल मंत्री के तौर पर मुकुल रॉय का नाम सुझाया है. इस बीच यात्री किराया के रोलबैक के लिए के लिए गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद संसद परिसर में धरना देंगे.

तृणमूल कांग्रेस सांसद और केंद्रीय मंत्री इसके लिए कोलकाता से दिल्ली को रवाना हो चुके हैं. रेल मंत्री बनने की खबरों पर मुकुल रॉय ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. ममता बनर्जी का एक दबाव और केंद्र सरकार ने सरेंडर कर दिया.

रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी की कुर्सी उसी रात चली गई, जिस दिन उन्होंने देश को अपना पहला रेल बजट दिया. ममता का गुस्सा एक झटके में त्रिवेदी की कुर्सी उड़ा ले गया और दिनेश त्रिवेदी की छुट्टी हो गई. भारतीय लोकतंत्र में पहली बार सरकार की सबसे बड़ी फजीहत हुई और रेल बजट के 24 घंटे के अंदर ही रेल मंत्री की कुर्सी चली गई.

सुबह रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी जब संसद के लिए निकल रहे थे तो चेहरे पर खिलती मुस्कान कह रही थी कि उनके जीवन का ये पहला रेल बजट कुछ इतिहास गढ़ेगा. इतिहास तो गढ़ा गया. लेकिन ऐसा इतिहास, जो कोई भी दुहराना नहीं चाहेगा. सुबह की मुस्कान शाम तक चेहरे से गायब हो चुकी थी. और रेल मंत्री की कुर्सी देर रात तक उन्हें छोड़ देनी पड़ी.

दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट पेश किया तो बरसों बाद यात्री किरायों में इजाफे का एलान कर दिया. विपक्षी तो बाद में भड़कते, अपनी पार्टी के लोग ही मोर्चा खोल बैठे. ममता बनर्जी तो सबसे ज्यादा नाराज हुईं. ममता का इस कदर गुस्सा होना, दोपहर में ही तय हो गया कि सरकार की तो फजीहत होगी ही.

हालांकि, खुद रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को ये अहसास हो गया था कि अब ममता की ममता ज्यादा वक्त तक उनपर नहीं बरसेगी. लिहाजा वो भगवान की शरण में जा चुके थे. लेकिन सियासत में भगवान से आप डरें या ना डरें, आलाकमान से तो डरना ही पड़ता है. लगता है दिनेश त्रिवेदी ये फॉर्मूला भूल गए थे. इसके बाद जो हुआ, उसका अंदाजा किसी को नहीं था.

ममता ने पीएम को खत लिखकर दिनेश त्रिवेदी को फौरन हटाने की मांग कर दी. और अपनी पार्टी कोटे से अगले रेल मंत्री का नाम भी सुझा दिया मुकुल रॉय का. सरकार की तरफ से ममता को समझाने की पूरी कोशिश हुई. लेकिन ममता बनर्जी नहीं मानीं.

आजतक को सूत्रों से जो जानकारी मिली, वो बताती है कि दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा दे दिया और प्रधानमंत्री ने उसे मंजूर भी कर लिया. जाहिर है, ममता के दबाव की वजह से मनमोहन सिंह अपने एक मंत्री की कुर्सी भी नहीं बचा पाए.

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